
gmedianews24.com/देश में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता के मौजूदा मानकों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने याचिका को ‘शहरी नजरिए से जुड़ा हुआ’ बताते हुए कहा कि देश की जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है. CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘देश के बड़े हिस्से में लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं है. ऐसे में पानी की गुणवत्ता का मुद्दा बाद में आता है. ग्रामीण इलाकों में लोग ज़मीन का पानी पीते हैं. आप बोतलबंद पानी में कौन-सा तत्व जोड़ा जाए या हटाया जाए, इस पर कोर्ट से निर्देश चाहते हैं, ये एक लग्ज़री इश्यू है.’
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि बोतलबंद पानी को लेकर वैधानिक मानक मौजूद हैं और फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए. इस पर CJI ने कहा कि अगर ऐसे मानक हैं, तो उन्हें लागू करने के लिए सक्षम प्राधिकरण भी मौजूद है और वही इस पर विचार करेगा. CJI ने सवाल उठाया, ‘क्या हम भारत में पानी से जुड़ी वही चुनौतियां झेलते हैं, जो UK, सऊदी अरब या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हैं? क्या हम उनके जैसे मानक यहां लागू कर सकते हैं?’ उन्होंने कहा कि यह याचिका ‘अर्बन फोबिया’ को दर्शाती है, जिसमें देश की असली स्थिति को नजरअंदाज किया गया है.





