
gmedianews24.com/नई दिल्ली। आज देशभर में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह चतुर्थी विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अखुरथ संकष्टी का व्रत करने से सभी दुख, बाधा और संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।
संकष्टी व्रत की विधि (Sankashti Chaturthi 2025 Puja Vidhi)
संकष्टी व्रत का पालन करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और लाल कपड़े पहनने की परंपरा है। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन सात्विक जीवन बिताने का संकल्प करें।
शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। पूजा के लिए एक वेदी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और उन्हें पंचामृत से अभिषेक कराएं। गणेश जी को लाल चंदन, लाल फूल और दूर्वा अर्पित करना चाहिए। व्रत कथा का पाठ और आरती करना इस दिन की महत्त्वपूर्ण परंपरा है।
चंद्र दर्शन का महत्व
संकष्टी व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। रात में जब चंद्रमा दिखाई दे, तब उन्हें जल, दूध, चंदन और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें। पूजा के अंत में सभी गलती और भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करना चाहिए।
भोग सामग्री (Sankashti Chaturthi 2025 Bhog List)
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मोदक/लड्डू – भगवान गणेश को मोदक बेहद प्रिय हैं। इसके अलावा बेसन या तिल के लड्डू का भोग भी लगाया जा सकता है।
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फल – केला और मौसमी फल अर्पित करें।
पूजन मंत्र (Puja Mantra)
पूजा के समय मंत्र का उच्चारण करें:
ॐ गं गणपतये नमः
दान का महत्व (Sankashti Chaturthi 2025 Daan)
इस दिन तिल, गुड़ और वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि तिल का दान करने से शनि दोष और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का यह व्रत न केवल आध्यात्मिक बल प्रदान करता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का भी मार्ग प्रशस्त करता है।




