अन्नपूर्णा जयंती 2025: आज मां अन्नपूर्णा की पूजा से भरेंगे अन्न भंडार, जानें देवी के अवतरण की पौराणिक कथा

gmedianews24.com/नई दिल्ली। देवी अन्नपूर्णा की कृपा से घर-परिवार में अन्न, धन और समृद्धि की कभी कमी नहीं रहती। इसी आस्था के साथ हर साल मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि पर अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 4 दिसंबर को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा और कथा पाठ करने से जीवन में अन्न-समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
अन्नपूर्णा जयंती का महत्व
अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। पुराणों में वर्णित है कि संसार में अन्न के बिना जीवन असंभव है, और माता अन्नपूर्णा उसी अन्न की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस दिन भक्त मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और घरों में भी अन्नपूर्णा स्तुति और कथा का पाठ किया जाता है।
क्या है देवी अन्नपूर्णा के अवतरण की पौराणिक कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि संसार की हर वस्तु, यहां तक कि भोजन भी एक माया है। भगवान शिव के इन शब्दों से माता पार्वती को अन्न का अपमान महसूस हुआ। उन्होंने क्रोधित होकर निर्णय लिया कि वे संसार से अन्न को गायब कर देंगी।
इसके बाद पूरी धरती पर अन्न का संकट गहराने लगा और लोग भुखमरी से व्याकुल होकर इधर-उधर भटकने लगे। यह देखकर माता पार्वती को दया आई और उन्होंने देवी अन्नपूर्णा का रूप धारण किया। इस स्वरूप में माता के हाथों में एक अक्षय पात्र था, जिसमें भोजन कभी समाप्त नहीं होता।
भिक्षुक बनकर पहुंचे भगवान शिव
जब अन्न का संकट चरम पर पहुंच गया, तब भगवान शिव ने भी एक भिक्षु का वेश धारण किया और माता अन्नपूर्णा के पास भोजन मांगने पहुंचे। उन्होंने स्वीकार किया कि शरीर, अन्न और भोजन का संसार में अत्यधिक महत्व है। तब मां अन्नपूर्णा ने भगवान शिव को अन्न का दान दिया, जिसे उन्होंने पृथ्वी पर बांट दिया। इससे पृथ्वी पर छाया अकाल समाप्त हुआ और पुनः जीवन में समृद्धि लौटी।
क्यों मनाई जाती है अन्नपूर्णा जयंती?
माना जाता है कि जिस दिन माता पार्वती ने अन्नपूर्णा का दिव्य रूप धारण किया, वह दिन मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा थी। उसी पावन तिथि पर भक्त हर साल अन्नपूर्णा जयंती मनाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।







