


रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के तुरंत बाद चीन ने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए एक अफवाह फैलाई कि भारतीय वायुसेना का राफेल फाइटर जेट गिरा दिया गया है। इन अकाउंट्स से AI से तैयार की गई नकली तस्वीरें पोस्ट की गईं, जिन्हें राफेल के कथित मलबे के रूप में प्रचारित किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने इस दुष्प्रचार के पीछे दो बड़े उद्देश्य साधे—
फ्रांस के राफेल जेट की अंतरराष्ट्रीय बिक्री पर असर डालना,
अपने नए J-35 लड़ाकू विमान को एक बेहतर विकल्प बताकर वैश्विक खरीदारों को प्रभावित करना।
USCC ने बताया कि चीन ने इस अभियानों के लिए समन्वित रूप से कई फर्जी अकाउंट्स, बॉट्स और AI कंटेंट का उपयोग किया, ताकि यह प्रचार वास्तविक और व्यापक लगे।
रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ने भारत-पाकिस्तान तनाव को “प्रचार के अवसर” के रूप में इस्तेमाल किया। उसने दोनों देशों के बीच स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और राफेल की क्षमताओं पर सवाल खड़े करने की कोशिश की।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय राफेल सुरक्षित हैं और किसी भी ऐसी घटना की पुष्टि नहीं होती। फ्रांस ने भी AI जनरेटेड तस्वीरों को “पूरी तरह फर्जी और भ्रामक” बताया है।
