
gmedianews24.com/नई दिल्ली। घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए वास्तु शास्त्र में हर कमरे, कोने और वस्तु की दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। जब घर का वास्तु सही होता है, तो जीवन की कई मुश्किलें स्वतः ही दूर हो जाती हैं। जिस तरह रसोई, पूजा घर, शयनकक्ष और मुख्य द्वार की दिशा मायने रखती है, उसी तरह गैराज (Garage Vastu) की दिशा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। भले ही गैराज मुख्य द्वार के बाहर होता है, लेकिन यह घर का ही हिस्सा माना जाता है और इसकी गलत दिशा कई तरह की बाधाओं का कारण बन सकती है।
गैराज की कौन-सी दिशा है शुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार गैराज को वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) दिशा में बनवाना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा वाहन संबंधी परेशानियों को दूर रखती है और ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखती है।
अगर उत्तर-पश्चिम दिशा में जगह उपलब्ध न हो, तो गैराज को आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण के बीच) दिशा में भी बनाया जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सबसे उत्तम वायव्य दिशा ही है।
ध्यान रहे कि गैराज को दक्षिण-पश्चिम दिशा में बिल्कुल भी नहीं बनाना चाहिए। यह दिशा घर में वास्तु दोष पैदा करती है और आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों का कारण बन सकती है।
मुख्य द्वार और गैराज के बीच की दूरी
वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि घर का गैराज कभी भी मुख्य द्वार से सटा हुआ नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से घर में आने वाली ऊर्जा बाधित होती है और अनचाहे तनाव पैदा हो सकते हैं।
वाहन किस दिशा में रखें?
गैराज में पार्किंग करते समय वाहन का मुंह उत्तर-पूर्व दिशा की ओर नहीं होना चाहिए। इसे अशुभ माना जाता है और इससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।







