
gmedianews24.com/कानपुर। साइबर अपराधी अब ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं, जिनमें से सबसे खतरनाक है डिजिटल अरेस्ट का झांसा। इसी पैटर्न का शिकार बनाने की कोशिश गोविंद नगर निवासी एक युवक के साथ की गई, लेकिन युवक की जागरूकता ने बड़ी ठगी होने से बचा लिया। शनिवार सुबह हुए इस मामले ने साइबर अपराधियों के नए ट्रिक को उजागर कर दिया है।
लखनऊ पुलिस बनकर दिया आतंकी खतरे का झांसा
गोविंद नगर निवासी पंकज चड्ढा के मुताबिक, शनिवार सुबह 10:15 बजे उनके फोन पर एक व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉलर ने खुद को लखनऊ पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा—
“आप पर आतंकी हमला होने का खतरा है।”
जालसाज ने आगे दावा किया कि पहलगाम हमले में पकड़े गए आतंकी ने उसका नाम लिया है, इसलिए उन्हें तुरंत ATS मुख्यालय लखनऊ आने का निर्देश दिया गया।
लखनऊ आने से इंकार किया तो बदल गया अपराधियों का अंदाज
पंकज द्वारा लखनऊ आने से मना करने पर पाँच मिनट बाद एक और नंबर से कॉल आई। इस बार कॉलर ने खुद को ATS का उच्च अधिकारी बताया और पंकज को उससे बात करने के लिए कहा। जब उन्होंने मना किया तो कॉलर ने जबरन वीडियो कॉल कर दिया।
वीडियो कॉल में एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहने दिखाई दिया, जिसने पहले जैसी ही बातें दोहराईं और पंकज से कहा—
“मोबाइल फुल चार्ज करो और आधार कार्ड लेकर बैठो।”
युवक को याद आई जागरूकता—समझ गए यह ठगी है
पंकज ने बताया कि उसी समय उन्हें याद आया कि कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सऐप या स्काइप से आधिकारिक बातचीत नहीं करती।
उन्होंने तुरंत कॉल काट दी और दोनों नंबर ब्लॉक कर दिए।
15 मिनट की डिजिटल अरेस्ट कोशिश नाकाम
पंकज ने बताया कि साइबर जालसाज उन्हें लगभग 15 मिनट तक डिजिटल अरेस्ट रखने में सफल रहे। लेकिन उन्होंने दैनिक जागरण में पढ़ी खबर से मिली जानकारी के चलते खुद को ठगी का शिकार होने से बचा लिया।







