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Chhattisgarh Opium Cultivation Case : अफीम पर एक्शन छत्तीसगढ़ में कृषि अधिकारी निलंबित, प्रोत्साहन राशि हड़पने का भी आरोप

फर्जीवाड़ा: मक्का बताया, मिली धान और अवैध अफीम

जांच दल ने जब जमीनी हकीकत खंगाली, तो भ्रष्टाचार की परतें खुलती गईं। विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार के खेत को कृषि विस्तार अधिकारी ने सरकारी दस्तावेजों में ‘मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट’ के रूप में दर्ज किया था। छापेमारी के दौरान वहां मक्के का एक दाना तक नहीं मिला। खेत में वास्तव में धान की खेती हो रही थी और उसके बीच में अवैध रूप से अफीम उगाई जा रही थी।

अधिकारी ने न केवल खेत का स्थान बदलकर शासन को गुमराह किया, बल्कि फर्जी प्रदर्शन प्लॉट के नाम पर मिलने वाली सरकारी प्रोत्साहन राशि भी जारी करा ली। यह सीधे तौर पर सरकारी धन के गबन और अवैध नशे के कारोबार को संरक्षण देने का मामला है। विभाग अब इस वित्तीय अनियमितता की भी गहनता से जांच कर रहा है।

“कृषि विस्तार अधिकारी ने जानबूझकर गलत जानकारी दी और शासन के साथ धोखाधड़ी की। प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। इस रैकेट में शामिल किसी भी कर्मचारी या बिचौलिए को बख्शा नहीं जाएगा।”
— जिला कृषि अधिकारी (DAO), छत्तीसगढ

इस घटना ने कृषि विभाग की फील्ड रिपोर्टिंग प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है। आम जनता और किसानों के लिए इसके मायने निम्नलिखित हैं:

  • प्रोत्साहन राशि की रिकवरी: फर्जी तरीके से ली गई प्रोत्साहन राशि की वसूली अब आरोपी अधिकारी और संबंधित किसान से की जाएगी।
  • सैटेलाइट मैपिंग का उपयोग: प्रशासन अब संदिग्ध क्षेत्रों में फसल सत्यापन के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लेने पर विचार कर रहा है।
  • सख्त निगरानी: अब से किसी भी प्रदर्शन प्लॉट की रिपोर्टिंग के समय जियो-टैगिंग (Geo-tagging) और फोटोग्राफ अनिवार्य कर दिए गए हैं।

पुलिस प्रशासन अब विमल ताम्रकार और विनायक ताम्रकार के खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट (NDPS) के तहत सख्त धाराओं में कार्रवाई कर रहा है। राजस्व विभाग की टीम खेत की सीमाओं का दोबारा सीमांकन कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी जमीन पर तो अतिक्रमण नहीं किया गया है।

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