
gmedianews24.com/रायपुर | 13 फरवरी: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने 10वीं और 12वीं की मुख्य परीक्षा शुरू होने से पहले एक सख्त फैसला लिया है। मंडल ने करीब 1400 से अधिक छात्र-छात्राओं को इस साल की बोर्ड परीक्षा के लिए ‘अपात्र’ घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद इन छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है और उनका पूरा एक साल बर्बाद होना तय माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु:
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प्रभावित छात्र: 10वीं और 12वीं के 1400 से ज्यादा विद्यार्थी।
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कारण: 75% उपस्थिति (Attendance) अनिवार्य होने का नियम।
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असर: ये छात्र इस साल मुख्य परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे, सीधे ‘ईयर बैक’ लगेगा।
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प्रशासनिक कदम: मंडल ने सभी स्कूलों को अपात्र छात्रों की सूची भेज दी है।
क्यों कटा छात्रों का पत्ता? (75% उपस्थिति का सख्त नियम)
छत्तीसगढ़ बोर्ड के नियमों के अनुसार, किसी भी नियमित (Regular) छात्र को बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए शैक्षणिक सत्र के दौरान कम से कम 75% उपस्थिति अनिवार्य है। मंडल ने पाया कि इन 1400 छात्रों की उपस्थिति इस मानक से काफी कम थी। स्कूलों द्वारा भेजे गए डेटा की स्क्रूटनी के बाद बोर्ड ने इनके एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) रोकने का फैसला किया है।
‘डमी’ छात्रों और लापरवाही पर प्रहार
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई छात्र स्कूलों में दाखिला तो ले लेते हैं लेकिन नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल नहीं होते। इनमें से कई छात्र कोचिंग संस्थानों में समय बिताते हैं या ‘डमी’ कैंडिडेट के तौर पर पढ़ाई करते हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अकादमिक अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना आवश्यक था।
स्कूलों और अभिभावकों में मचा हड़कंप
परीक्षा से ठीक पहले आई इस खबर ने छात्रों और उनके माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है। कई स्कूलों ने तर्क दिया है कि स्वास्थ्य कारणों या अन्य घरेलू समस्याओं की वजह से कुछ छात्रों की हाजिरी कम हुई है, लेकिन बोर्ड फिलहाल नियमों में ढील देने के मूड में नहीं दिख रहा है।
मंडल का रुख: “नियमों की जानकारी सत्र की शुरुआत में ही दे दी गई थी। जिन छात्रों ने पात्रता पूरी नहीं की है, उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”







