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Gas Pipeline New Rule 2026 : एनर्जी क्राइसिस के बीच बड़ा फैसला , ‘डीम्ड अप्रूवल’ नियम से अब रॉकेट की रफ्तार से बिछेंगी गैस पाइपलाइनें

  • नया कानून: पेट्रोलियम मंत्रालय ने ‘प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026’ को तत्काल प्रभाव से लागू किया।
  • लक्ष्य: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण बिगड़ी गैस सप्लाई को संभालना और PNG विस्तार तेज करना।
  • राहत: नए नियमों से गैस कनेक्शन की कागजी कार्यवाही कम होगी और सप्लाई की बाधाएं दूर होंगी।

gmedianews24.com/Gas Pipeline New Rule 2026 , नई दिल्ली — मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हड़कंप मचा दिया है। भारत में भी LPG की किल्लत और बढ़ती कीमतों के खतरे को देखते हुए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026’ को हरी झंडी दे दी है। इस नए नियम का सीधा मकसद देश के करोड़ों घरों तक पाइपलाइन गैस (PNG) की पहुंच को आसान और तेज बनाना है।

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क्यों पड़ी नए नियम की जरूरत?

वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस ‘एनर्जी क्राइसिस’ से निपटने के लिए सरकार अब पारंपरिक सिलेंडरों (LPG) के बजाय पाइपलाइन गैस पर दांव लगा रही है। 2026 का यह नया आदेश वितरण कंपनियों के लिए कड़े गाइडलाइन्स लेकर आया है, ताकि वे बिना किसी देरी के नए कनेक्शन उपलब्ध करा सकें।

  • सप्लाई चेन: अब कंपनियों को गैस वितरण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का काम तय समय सीमा में पूरा करना होगा।
  • आसान प्रक्रिया: नया कनेक्शन लेने के लिए लंबी कतारों और जटिल वेरिफिकेशन से छुटकारा मिलेगा।
  • प्राइस कंट्रोल: पाइपलाइन गैस को बढ़ावा देकर सरकार एलपीजी पर निर्भरता और सब्सिडी के बोझ को कम करना चाहती है।

जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल संकट का समाधान नहीं है, बल्कि भारत को ‘गैस-आधारित अर्थव्यवस्था’ बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। अब शहरी इलाकों में रहने वाले परिवारों को गैस खत्म होने की चिंता नहीं सताएगी, क्योंकि मीटर वाला कनेक्शन बिजली की तरह सीधे किचन तक पहुंचेगा।

“मिडिल ईस्ट का संकट हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर और अधिक गंभीर होने का संकेत दे रहा है। पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026 वितरण की बाधाओं को खत्म करेगा। हमारा लक्ष्य हर भारतीय रसोई को सुरक्षित और निर्बाध गैस सप्लाई प्रदान करना है।”
— पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी

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