
gmedianews24.com/नई दिल्ली। Chaitra Navratri के दौरान शक्ति उपासना का विशेष महत्व होता है। इन नौ दिनों में Durga के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन महाअष्टमी का दिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र में व्रत रखने के बाद यदि अष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा और कन्या पूजन नहीं किया जाए, तो पूजा अधूरी मानी जाती है।
महाअष्टमी कब है? (Chaitra Navratri 2026 Ashtami Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होगी और 26 मार्च 2026 को सुबह 11:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 26 मार्च को महाअष्टमी मनाई जाएगी।
महाअष्टमी का धार्मिक महत्व
नवरात्र की अष्टमी तिथि मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप को समर्पित मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन देवी की शक्तियों ने मिलकर महिषासुर के अंत की तैयारी की थी। इस दिन संधि पूजा का भी विशेष महत्व होता है, जो अष्टमी और नवमी के संधिकाल में की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने से पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कन्या पूजन का महत्व
महाअष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की परंपरा है। इसमें छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। आमतौर पर 9 कन्याओं और एक छोटे बालक (लंगूर) को भोजन करवाया जाता है।
कन्या पूजन की सही विधि (Kanya Pujan Rules)
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कन्याओं को एक दिन पहले सम्मान के साथ आमंत्रित करें।
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घर आने पर उनके पैर साफ पानी या दूध से धोकर आशीर्वाद लें।
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उन्हें साफ आसन पर बैठाकर माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं।
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कन्याओं के हाथ में कलावा बांधें।
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प्रसाद में हलवा, पूरी और काले चने श्रद्धा से परोसें।
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भोजन सात्विक होना चाहिए और इसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
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भोजन के बाद कन्याओं को फल, दक्षिणा और उपहार देकर सम्मानपूर्वक विदा करें।
धार्मिक मान्यता है कि महाअष्टमी के दिन विधि-विधान से कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।







