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AI के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ेगी बिजली की मांग, 2032 तक डेटा सेंटरों को चाहिए होंगे 13.56 गीगावॉट बिजली

gmedianews24.com/नई दिल्ली। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं के तेजी से बढ़ते उपयोग के चलते आने वाले वर्षों में डेटा सेंटरों की बिजली खपत में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। सरकार के अनुसार 2031-32 तक डेटा सेंटरों से बिजली की मांग बढ़कर 13.56 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।

केंद्र सरकार के मुताबिक भारत में डेटा सेंटर क्षमता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2020 में देश की डेटा सेंटर क्षमता करीब 375 मेगावॉट थी, जो बढ़कर 2025 तक लगभग 1,500 मेगावॉट हो गई है। अनुमान है कि अगले करीब 7 वर्षों में बिजली की मांग में लगभग 800 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।

राज्यसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री Jitin Prasada ने बताया कि देश में AI के विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। इसके तहत 14 सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के माध्यम से 38,231 GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) उपलब्ध कराए गए हैं।

इन GPU को स्टार्टअप, शोध संस्थानों और शिक्षण संस्थानों को औसतन 65 रुपये प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि AI तकनीक के विकास को गति मिल सके।

मंत्री ने बताया कि देश के प्रमुख डेटा सेंटर मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर जैसे बड़े शहरों में स्थापित हैं, जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की संख्या और बिजली की खपत दोनों में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है।

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