[metaslider id="31163"]
Featuredinternational

America’s Big Decision : पूरी दुनिया को रूस से तेल खरीदने की मिली छूट, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग

gmedianews24.com/America’s Big Decision : वाशिंगटन/नई दिल्ली: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। अमेरिका ने दुनिया के सभी देशों को रूस से फंसा हुआ कच्चा तेल खरीदने की 30 दिनों की अस्थाई अनुमति दे दी है। यह कदम तब उठाया गया है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतें 4 साल के रिकॉर्ड स्तर को पार करते हुए 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गई हैं।

क्यों लेना पड़ा यह फैसला?

1 मार्च 2026 को ईरान पर शुरू हुए हमलों के बाद से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद करने की चेतावनी दी है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। इस संकट की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमतें अचानक $120 तक उछल गई थीं।

अमेरिका की नई ट्रेड जांच में भारत समेत 16 देश शामिल, ट्रंप प्रशासन के कदम से बढ़ी चिंता

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन रूसी तेल टैंकरों के लिए है जो 12 मार्च 2026 तक समुद्र में लद चुके थे और प्रतिबंधों के कारण फंसे हुए थे। उन्होंने कहा:

“यह एक ‘शॉर्ट-टर्म’ उपाय है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कमी न हो। इससे रूस को कोई नया बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, बल्कि पहले से मौजूद सप्लाई को बाजार तक पहुँचाया जा रहा है।”

30 दिनों की डेडलाइन

अमेरिकी के अनुसार, यह छूट 11 अप्रैल 2026 की आधी रात तक मान्य रहेगी। इस दौरान भारत, चीन और यूरोपीय देश उन रूसी जहाजों से तेल ले सकेंगे जो फिलहाल अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अटके हुए हैं।

भारत के लिए क्या हैं मायने?

भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा रूस से आयात करता रहा है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ लगाने की बात कही थी। लेकिन अब, इस नई छूट और अमेरिका-भारत के बीच हुए हालिया व्यापार समझौतों के बाद, भारतीय रिफाइनरियों (जैसे IOC, BPCL) के लिए सस्ते रूसी तेल का रास्ता साफ हो गया है।

Related Articles

Back to top button