
gmedianews24.com/मकान बनाना जीवन का सबसे बड़ा निवेश माना जाता है। व्यक्ति अपनी मेहनत और कमाई का बड़ा हिस्सा घर बनाने में लगाता है। लेकिन अगर जमीन शुभ न हो तो बार-बार आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक तनाव और पारिवारिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है।
वास्तु शास्त्र में जमीन को केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं माना जाता, बल्कि इसे ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। इसमें सूर्य की किरणें, पृथ्वी का चुम्बकीय प्रभाव, जल स्तर और दिशाओं की ऊर्जा सक्रिय रहती है। यदि जमीन में दोष या नकारात्मक ऊर्जा हो तो घर में रहने वाले लोगों के जीवन पर इसका सीधा असर पड़ता है।
इसी कारण निर्माण से पहले जमीन का परीक्षण करना बेहद जरूरी बताया गया है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार जमीन की जांच क्यों महत्वपूर्ण है?
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन का प्रभाव घर के वातावरण और परिवार की खुशहाली पर पड़ता है। अगर जमीन दोषपूर्ण हो तो व्यक्ति को बार-बार बीमारी, आर्थिक रुकावट, झगड़े और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
कई मान्यताओं के अनुसार गलत जमीन पर घर बनाने से ग्रहदशा भी प्रतिकूल हो सकती है। इसलिए निर्माण शुरू करने से पहले जमीन की ऊर्जा और गुणवत्ता की जांच करना आवश्यक माना गया है।
गड्ढा जांच विधि – सबसे आसान और प्राचीन तरीका
जमीन की जांच के लिए यह सबसे सरल और प्राचीन विधि मानी जाती है। इसे सदियों से उपयोग में लाया जा रहा है।
कैसे करें परीक्षण?
जिस स्थान पर मकान बनाना हो, वहां अपनी कोहनी से कनिष्ठा (छोटी उंगली) तक की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का एक गड्ढा खोदें। फिर उसी मिट्टी को वापस उसी गड्ढे में भर दें।







