
gmedianews24.com/बिलासपुर। समाज और चिकित्सा विज्ञान के प्रति प्रेरणादायक कदम उठाते हुए सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र तिवारी (76 वर्ष) ने मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए दान करने का निर्णय लिया है।
अज्ञेय नगर निवासी तिवारी ने छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) के एनाटॉमी विभाग में देहदान के लिए आवेदन पत्र भरकर औपचारिक घोषणा कर दी है। उन्होंने अपने घोषणा पत्र में कहा कि उनके निधन के बाद उनके शरीर का उपयोग मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्य में किया जाए — यही समाज और विज्ञान के प्रति उनकी अंतिम सेवा होगी।
परिवार की सहमति, पुत्र निभाएंगे जिम्मेदारी
इस मानवीय पहल में उनके पुत्र राहुल तिवारी ने भी सहमति दी है। घोषणा पत्र के अनुसार, तिवारी के निधन के बाद संस्थान को सूचना देने की जिम्मेदारी उनके पुत्र की होगी। देहदान संकल्प के दौरान गवाह के रूप में प्रतीप पाठक सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
सिम्स प्रबंधन ने जताया आभार
संस्थान के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष ने सुरेंद्र तिवारी के इस निर्णय को समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे महान निर्णयों से चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा मिलती है और भावी डॉक्टरों को सीखने व शोध के बेहतर अवसर प्राप्त होते हैं।
देहदान के इस संकल्प को क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता और मानव सेवा का अनुकरणीय उदाहरण माना जा रहा है।







