
gmedianews24.com/नई दिल्ली। लिवर से जुड़ी बीमारियों को अब केवल शराब से जोड़कर देखना गलत साबित हो रहा है। मोटापा, डायबिटीज और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां भी तेजी से लिवर को प्रभावित कर रही हैं। एक नई स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक देश के करीब 40% वयस्क मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) से प्रभावित हो सकते हैं। पहले इस बीमारी को नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के नाम से जाना जाता था।
यह अध्ययन इसी महीने प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में देश के 27 शहरों के प्रतिभागियों का विश्लेषण किया गया।
बिना लक्षण के बढ़ती है बीमारी, देर से पता चलना खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है। जब तक इसका पता चलता है, तब तक लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है।
अध्ययन में 38.9% प्रतिभागियों में फैटी लिवर के संकेत पाए गए। इनमें से 6.3% लोगों में लिवर फाइब्रोसिस यानी शुरुआती स्थायी डैमेज के लक्षण मिले, जो आगे चलकर सिरोसिस या लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।
दिल्ली समेत कई शहरों में चिंताजनक स्थिति
राजधानी दिल्ली के आंकड़े भी गंभीर तस्वीर दिखाते हैं। यहां 41.3% लोगों में फैटी लिवर पाया गया, जबकि 4.5% आबादी में फाइब्रोसिस के संकेत दर्ज किए गए।
अन्य शहरों में स्थिति और ज्यादा चिंताजनक रही—
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भोपाल में 51.8% लोगों में समस्या
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श्रीनगर में 54.4% लोगों में फैटी लिवर के संकेत
सामान्य वजन वाले लोग भी खतरे में
स्टडी में यह भी सामने आया कि सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले कई लोगों में भी यह बीमारी विकसित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण शरीर के अंदर जमा होने वाली विसरल फैट है, जो बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन मेटाबॉलिक जोखिम को बढ़ा देती है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी से बचाव के लिए—
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संतुलित आहार
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नियमित व्यायाम
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ब्लड शुगर और वजन नियंत्रण
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समय-समय पर लिवर जांच
बेहद जरूरी है।






