
gmedianews24.com/नई दिल्ली। कथित कोयला चोरी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि मुख्यमंत्री और राज्य की मशीनरी ने जांच में हस्तक्षेप किया और छापेमारी के दौरान अवैध रूप से कार्रवाई में बाधा डाली।
I-PAC कार्यालय पर रेड में हस्तक्षेप का आरोप
ED ने अदालत को बताया कि कथित कोयला चोरी घोटाले की जांच के तहत I-PAC के दफ्तर और उसके निदेशक के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलीभगत कर एजेंसी की कार्रवाई में रुकावट डाली।
एजेंसी का आरोप है कि यह सब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के निजी लाभ के लिए किया गया और मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत जांच कर रहे अधिकारियों को काम करने से रोका गया।
CBI जांच की मांग
ED ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। एजेंसी का कहना है कि 8 जनवरी को I-PAC कार्यालयों पर रेड के दौरान मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस अधिकारियों ने उनकी कार्रवाई में बाधा पहुंचाई।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाली
मामले की सुनवाई फिलहाल 18 मार्च तक के लिए टाल दी गई है। इससे पहले भी 3 फरवरी को सुनवाई स्थगित की गई थी।
अदालत ने 15 जनवरी को टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय एजेंसी की जांच में बाधा डालना अत्यंत गंभीर मुद्दा है।







