
gmedianews24.com/नई दिल्ली। भारत की तेल आयात नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर सख्त रुख अपनाने और टैरिफ विवाद के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय कमी की है। ताजा आंकड़ों के अनुसार अब सऊदी अरब फिर से भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है।
टैरिफ विवाद के बाद समझौता
अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर नाराजगी जताते हुए भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया। बाद में 2 फरवरी को ट्रंप ने घोषणा की कि समझौते के तहत भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करेगा, जिसके बदले यह टैरिफ हटा दिया गया। साथ ही 25% रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया।
रूस से आयात में भारी गिरावट
आंकड़े बताते हैं कि रूस से भारत के माल आयात में जनवरी में 40.5% की गिरावट दर्ज हुई। एक साल पहले जहां आयात 4.81 अरब डॉलर था, वह घटकर 2.86 अरब डॉलर रह गया।
इस गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में तेज कटौती बताई जा रही है। भारत के रूस से कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 80% रही है, जिससे तेल खरीद घटते ही कुल व्यापार पर बड़ा असर पड़ा।
सबसे कम स्तर पर पहुंची रूसी तेल खरीद
जनवरी में भारत ने रूस से करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम है। भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 21.2% रह गई। यह दिसंबर के मुकाबले 23.5% कम और पिछले साल की तुलना में लगभग एक-तिहाई कम है।
सऊदी अरब फिर शीर्ष पर
रॉयटर्स के अनुसार मध्य-पूर्व से तेल खरीद जनवरी में 2022 के बाद सबसे अधिक रही। इसी के साथ सऊदी अरब ने भारत के शीर्ष आपूर्तिकर्ता के रूप में फिर से जगह बना ली है। फरवरी में वहां से आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के संकेत हैं।







