
gmedianews24.com/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी बिना किसी वैध और पर्याप्त कारण के पति और ससुराल से अलग रह रही है, तो वह मासिक भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि जब पति वैवाहिक संबंध बचाने का प्रयास करता है और पत्नी साथ रहने को तैयार नहीं होती, तो भरण-पोषण का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
परिवार न्यायालय का आदेश बरकरार
मामला बिलासपुर निवासी प्रवीण कुमार वेदुला से जुड़ा है। पत्नी ने परिवार न्यायालय द्वारा भरण-पोषण से इंकार किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने की। अदालत ने पाया कि परिवार न्यायालय के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है, इसलिए हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
वैवाहिक विवाद में आचरण भी अहम
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में केवल संबंध ही नहीं, बल्कि दोनों पक्षों का आचरण भी न्याय का महत्वपूर्ण आधार होता है। यदि पत्नी बिना उचित कारण पति से अलग रहती है, तो भरण-पोषण की मांग उचित नहीं मानी जा सकती।







