
gmedianews24.com/समय को जीवन की सबसे मूल्यवान पूंजी माना जाता है। सुख-दुख, सफलता-असफलता और जीवन के उतार-चढ़ाव समय के साथ आते-जाते रहते हैं। वास्तु शास्त्र में घड़ी को समय की ऊर्जा को नियंत्रित करने वाली महत्वपूर्ण वस्तु माना गया है। मान्यता है कि घर या कार्यालय में लगी घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं होती, बल्कि यह जीवन की गति, सोच और परिस्थितियों को भी प्रभावित करती है।
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि घड़ी सही दिशा और उचित स्थान पर लगाई जाए, तो व्यक्ति के जीवन में चल रही नकारात्मक परिस्थितियां धीरे-धीरे सकारात्मकता में बदल सकती हैं।
घड़ी का वास्तु में विशेष महत्व
वास्तु के अनुसार घर की हर वस्तु ऊर्जा को प्रभावित करती है और घड़ी समय की ऊर्जा का प्रतीक होती है। जिस तरह समय लगातार आगे बढ़ता है, उसी तरह घड़ी की दिशा और स्थिति जीवन की प्रगति को दर्शाती है। गलत दिशा में लगी घड़ी कार्यों में रुकावट, देरी और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है, जबकि सही दिशा सकारात्मक बदलाव लाती है।
घड़ी लगाने की शुभ दिशाएं
वास्तु मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा घड़ी लगाने के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। यह दिशा धन, उन्नति और नए अवसरों से जुड़ी मानी जाती है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने और कामों में गति आने की संभावना रहती है।
पूर्व दिशा भी घड़ी लगाने के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसे नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है।
किन दिशाओं से करें परहेज
दक्षिण दिशा में घड़ी लगाना अशुभ माना जाता है। इससे जीवन में बार-बार बाधाएं, असफलता और मानसिक दबाव बढ़ सकता है।
वहीं पश्चिम दिशा में घड़ी लगाने से कार्यों में देरी, योजनाओं का अटकना और परिणाम मिलने में विलंब हो सकता है।
बंद या खराब घड़ी क्यों मानी जाती है अशुभ
वास्तु के अनुसार बंद या खराब घड़ी नकारात्मक ऊर्जा का संकेत होती है और यह जीवन में ठहराव का प्रतीक मानी जाती है। ऐसी घड़ी दुर्भाग्य और निराशा बढ़ा सकती है। इसलिए घर में बंद या टूटी घड़ी रखने से बचना चाहिए। यदि घड़ी खराब हो जाए तो उसे तुरंत ठीक कराएं या हटा दें।
घड़ी का आकार, रंग और स्थान भी अहम
वास्तु में गोल आकार की घड़ी सबसे शुभ मानी जाती है, क्योंकि यह संतुलन और सकारात्मकता का प्रतीक है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम, हरा या नीला शुभ माने जाते हैं।
बेडरूम में घड़ी को बिस्तर के ठीक सामने लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं पूजा कक्ष में घड़ी लगाने की भी सलाह नहीं दी जाती।







