
gmedianews24.com/रायपुर। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र जी के ननिहाल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोमवार को निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी का मंगल पदार्पण हुआ। वे रायपुर विमानतल पहुंचे, जहां आयोजक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, प्रदेश सह-कार्यालय मंत्री भारतीय जनता पार्टी प्रीतेश गांधी, अनूप अग्रवाल और अशोक अग्रवाल सहित अन्य लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया।
मीडिया से बातचीत में स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक अत्यंत धार्मिक भूमि है, जहां की संस्कृति और परंपराएं गौरवशाली रही हैं। उन्होंने कहा कि मां दंतेश्वरी की पावन स्थापना इस प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करती है। स्वामी जी ने बताया कि नितिन अग्रवाल के आग्रह पर ही उनका रायपुर आगमन हुआ है।
उन्होंने कहा कि रामकाल से ही छत्तीसगढ़ में धर्म और साधना की परंपरा रही है। यहां के लोग साधु-संतों के प्रति गहरी आस्था रखते हैं, यही कारण है कि छत्तीसगढ़ अन्य राज्यों की तुलना में आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
धर्मांतरण के मुद्दे पर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातनियों को अपने धर्म में रहते हुए समाज सेवा और राष्ट्रहित के कार्य करने चाहिए। उन्होंने शासन से इस विषय में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। स्वामी जी ने कहा कि धर्मांतरण दो प्रकार के होते हैं—बलात और लोभ के माध्यम से—और दोनों ही स्वीकार्य नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “हम श्रीराम और श्रीकृष्ण के उपासक हैं। हम किसी भी धर्म की निंदा नहीं करते, क्योंकि मूल में सभी परंपराएं समान मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं। लेकिन लालच देकर या दबाव बनाकर धर्मांतरण कराना अनुचित है और इसे रोका जाना चाहिए।”







