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राजनीति में गरमाया टीपू सुल्तान विवाद, तस्वीर से शुरू हुआ घमासान बना सियासी मुद्दा

gmedianews24.com/मुंबई/मालेगांव। टीपू सुल्तान को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों गरमाई हुई है। मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से शुरू हुआ विवाद अब राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।

समाजवादी पार्टी की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में तस्वीर लगाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से किए जाने पर विवाद और बढ़ गया।

‘सामना’ का संपादकीय और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

इस पूरे विवाद के बीच शिवसेना UBT के मुखपत्र सामना ने संपादकीय में बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा। लेख में कहा गया कि औरंगजेब और अफजल खान की तरह टीपू सुल्तान को भी बार-बार कब्र से बाहर निकालकर राजनीति की जा रही है।

संपादकीय में बताया गया कि मालेगांव के ‘शान-ए-हिंद’ हॉल में तस्वीर लगाने से विवाद शुरू हुआ और बाद में तस्वीर हटाने के बावजूद आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। लेख में हर्षवर्धन सपकाल के बयान को अनुचित बताते हुए कहा गया कि छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना किसी से नहीं की जा सकती।

बीजेपी और सरकार पर भी उठाए सवाल

संपादकीय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की आलोचना पर सवाल उठाए गए। साथ ही पूछा गया कि यदि टीपू को लेकर इतना आक्रोश है, तो पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच पर विरोध क्यों नहीं होता।

लेख में कहा गया कि भारत-पाक क्रिकेट आयोजन से जुड़े अमित शाह के बेटे जय शाह की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए, यदि टीपू को लेकर आक्रोश वास्तविक है।

इतिहास बनाम वर्तमान राजनीति

संपादकीय में टीपू सुल्तान के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा गया कि वह मैसूर का शासक था और उसने अंग्रेजों से युद्ध किया। 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में उसकी मृत्यु हुई। कुछ इतिहासकार उसे अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला प्रारंभिक योद्धा मानते हैं।

हालांकि लेख में यह भी कहा गया कि टीपू सुल्तान पर जबरन धर्म परिवर्तन और अत्याचार के आरोप भी लगते रहे हैं, जिससे विवाद बार-बार भड़कता है। वहीं छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज को अद्वितीय बताते हुए उनकी तुलना किसी से भी न करने की बात कही गई।

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