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अंधेरे में सांसत में फंसी रही जान, 40 हाथियों के दल ने मचाया कहर

gmedianews24.com/कोरबा। जिले में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कटघोरा वनमण्डल से सामने आया है, जहां करीब 40 हाथियों के एक विशाल दल ने दस्तक देकर ग्रामीणों के साथ-साथ कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों की जान भी खतरे में डाल दी। हैरानी की बात यह रही कि शाम से लेकर देर रात तक लोग हाथियों से बचने इधर-उधर भागते रहे, लेकिन पूरे मूवमेंट क्षेत्र में कहीं भी वन अमला नजर नहीं आया।

दरअसल, कटघोरा वनमण्डल की जटगा रेंज अंतर्गत कटोरीनगोई के आश्रित मोहल्ला धोबीबारी में दो दिन पहले हाथियों के दल ने भारी उत्पात मचाया। हाथियों ने करीब 10 कच्चे-पक्के मकानों को तोड़ दिया, वहीं कुछ पालतू जानवरों को भी कुचलकर मार डाला। इस तबाही से कई निर्धन परिवारों का सब कुछ उजड़ गया। मजबूरन पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे, पेड़ों की शरण में रात गुजारने को विवश हैं।

हाथियों द्वारा की गई इस बर्बादी का ग्राउंड कवरेज करने शुक्रवार को धोबीबारी पहुंचे पत्रकार शारदा पाल, नानक सिंह राजपूत, लक्ष्मण महंत और हरीश साहू भी उस समय मुश्किल में फंस गए, जब अंधेरा होते ही हाथियों के दल ने गांव से निकलने का एकमात्र रास्ता घेर लिया। ग्रामीणों और पत्रकारों की जान पर बन आई। चारों ओर अंधेरा, सामने हाथियों का झुंड और पीछे भयभीत ग्रामीण—हर कोई दहशत में सांसें थामे रहा।

रात भर लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपते और भागते रहे, लेकिन किसी भी स्तर पर वन विभाग की त्वरित
पक्ष से त्वरित सहायता या सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। इस घटना ने एक बार फिर वन अमले की सतर्कता और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में की जा रही तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग मौके पर पहुंचता और हाथियों को खदेड़ने की व्यवस्था करता, तो इतना बड़ा खतरा टल सकता था। फिलहाल गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग हर रात किसी अनहोनी के डर में जीने को मजबूर हैं।

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