
gmedianews24.com/नई दिल्ली। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
शिवलिंग की पूजा के बाद अक्सर भक्त नंदी महाराज के कान में धीरे से अपनी मनोकामना कहते नजर आते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नंदी के कान में कही गई बात सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है, लेकिन इसके लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है।
नंदी को क्यों माना जाता है संदेशवाहक?
नंदी महाराज को भगवान शिव का परम भक्त, वाहन और द्वारपाल माना जाता है। मंदिरों में उनकी प्रतिमा हमेशा शिवलिंग की ओर मुख किए रहती है, जो उनके अटूट ध्यान का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव गहरी समाधि में होते हैं, तब भक्त अपनी प्रार्थना नंदी तक पहुंचाते हैं और नंदी उचित समय पर उसे महादेव तक पहुंचाते हैं।
दाहिने कान में ही क्यों कहते हैं मनोकामना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नंदी के दाहिने कान में इच्छा कहना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से प्रार्थना अधिक प्रभावी होती है।
मनोकामना कहते समय इन नियमों का रखें ध्यान
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पहले पूजा करें: शिवलिंग की विधिवत पूजा करें और नंदी के पास दीपक जलाकर भोग अर्पित करें।
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मंत्र का जाप करें: इच्छा बताने से पहले “ॐ” या “ॐ नंदीश्वराय नमः” का जाप करें।
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गोपनीय रखें बात: मनोकामना धीरे और स्पष्ट कहें, होंठों को हाथ से ढक लें ताकि कोई और न सुन सके।
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कान बंद करने की मान्यता: कुछ परंपराओं में दाहिने कान में बोलते समय बाएं कान को हाथ से बंद करने की मान्यता है।
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एक ही इच्छा कहें: एक समय में एक ही मनोकामना बताने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार श्रद्धा और नियमों के साथ कही गई प्रार्थना नंदी महाराज के माध्यम से भगवान शिव तक पहुंचती है और भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।







