
gmedianews24.com/हिंदू धर्म में घर बनवाते समय पूजा घर के निर्माण और उसकी दिशा को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि यदि पूजाघर वास्तु के अनुसार सही दिशा में बना हो, तो घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। केवल मंदिर की दिशा ही नहीं, बल्कि पूजा करते समय साधक का मुख किस दिशा में हो—यह भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार पूजा के दौरान मुख की दिशा से मिलने वाली ऊर्जा व्यक्ति के जीवन पर सीधा प्रभाव डालती है। आइए जानते हैं पूजा करते समय कौन-सी दिशा शुभ मानी जाती है।
उत्तर दिशा में मुख करके पूजा
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा में मुख करके पूजा करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा कहा गया है। मान्यता है कि उत्तर की ओर मुख कर पूजा करने से साधक कुबेर की सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ता है, जिससे आय में वृद्धि होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। नियमित रूप से उत्तर दिशा में पूजा करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
पूर्व दिशा में मुख करके पूजा
पूर्व दिशा को सूर्य की दिशा माना गया है। सूर्य को ज्ञान, चेतना, आत्मबल और विवेक का स्रोत कहा जाता है। पूर्व की ओर मुख करके की गई पूजा से बुद्धि तेज होती है और अंतर्मन जाग्रत होता है। साथ ही समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। शिक्षा, साधना, ज्ञान-प्राप्ति और आत्मिक विकास के लिए पूर्वाभिमुख पूजा को श्रेष्ठ माना गया है।
पश्चिम दिशा में पूजा का महत्व
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पश्चिम दिशा में मुख करके पूजा करना भी शुभ माना गया है, बशर्ते पूजा स्थल का द्वार पूर्व दिशा में हो। ऐसी स्थिति में पूजा करते समय यदि साधक का मुख पूर्व दिशा की ओर रहे, तो भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
क्या दक्षिण दिशा में मुख करके पूजा करनी चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है। शास्त्रों में इस दिशा को पूजा के लिए अनुकूल नहीं बताया गया है। मान्यता है कि दक्षिण दिशा में मुख करके पूजा करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। पितरों और ईश्वर का स्थान शास्त्रों में अलग-अलग बताया गया है, इसलिए दक्षिण दिशा में बैठकर पूजा करने से बचना चाहिए।







