संसद में गूंजे नारे, सेना की वर्दी में नजर आए सांसद
रविवार को तेहरान में आयोजित संसद सत्र के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। अपनी एकजुटता दिखाने के लिए ईरान के कई सांसद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की वर्दी पहनकर सदन पहुंचे। कालिबाफ ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि “यूरोपीय संघ ने अमेरिका के दबाव में आकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।”
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 29 जनवरी को यूरोपीय संघ ने IRGC को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। EU ने यह कदम ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान की गई सैन्य कार्रवाई के विरोध में उठाया था। अब ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यूरोपीय देशों की सेनाओं को भी उसी श्रेणी में डाल दिया है।
ईरान के कानून में बड़ा बदलाव
ईरान के संसद अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि ‘आतंकवादी संगठन के रूप में IRGC की घोषणा के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कानून’ की धारा 7 के तहत अब यूरोप की सेनाएं आतंकवादी मानी जाएंगी। इस कानून के लागू होने के बाद अब ईरान की सुरक्षा एजेंसियां यूरोपीय सैन्य अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकती हैं। कालिबाफ ने चेतावनी दी है कि इस फैसले के बाद होने वाले किसी भी परिणाम के लिए यूरोपीय संघ पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
Voices from the Ground / Official Statements
“यूरोपीय संघ ने एक गैर-जिम्मेदाराना फैसला लिया है। हम अब उनकी सेनाओं के साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे जैसा हम अन्य आतंकवादी समूहों के साथ करते हैं। यह फैसला पश्चिम की गिरती हुई वैश्विक साख का नतीजा है।”
— मोहम्मद बाकिर कालिबाफ, अध्यक्ष, ईरानी संसद
वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर क्या होगा असर?
इस घोषणा के बाद पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में सुरक्षा संकट गहराने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खाड़ी क्षेत्र (Persian Gulf) में यूरोपीय जहाजों और सैन्य बेस पर खतरा बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि ईरान के साथ भारत के सामरिक और व्यापारिक संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं।







