
मामला क्या है
अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के मुताबिक, यह तैनाती सुरक्षा और दबाव की रणनीति का हिस्सा है। USS अब्राहम लिंकन के साथ कई विध्वंसक युद्धपोत और निगरानी विमान भी तैनात हैं। यह कदम ऐसे समय आया है, जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी तेज है और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत ठप पड़ी है। ईरान ने जवाब में अपने तटीय इलाकों और प्रमुख सैन्य ठिकानों पर सतर्कता बढ़ा दी है। तेहरान में सरकारी इमारतों के आसपास सुरक्षा कड़ी दिखी। रात के वक्त सैन्य काफिले शहर से बाहर जाते नजर आए।
आधिकारिक बयान
“यह तैनाती किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है। हम अपने हितों और सहयोगियों की सुरक्षा करेंगे।”
— अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी
“अगर हमला हुआ तो जवाब तुरंत और सख्त होगा।”
— ईरानी विदेश मंत्रालय का बयान
आम लोगों पर असर और आगे क्या
स्थिति बिगड़ने पर तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए दूतावास सतर्कता संदेश जारी कर सकता है। फिलहाल किसी उड़ान या समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शिपिंग कंपनियां मार्ग बदलने पर विचार कर रही हैं।







