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भीष्म अष्टमी आज, पितामह भीष्म को समर्पित है यह पावन तिथि

gmedianews24.com/नई दिल्ली। सनातन धर्म में भीष्म अष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह पावन तिथि महाभारत के महानायक, धर्म, त्याग और दृढ़ प्रतिज्ञा के प्रतीक पितामह भीष्म को समर्पित है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ही पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर इच्छामृत्यु का वरण किया था। इस वर्ष भीष्म अष्टमी 26 जनवरी, सोमवार यानी आज मनाई जा रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भीष्म अष्टमी के दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध कर्म और उनकी आरती करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही कुंडली में मौजूद ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी शांत होते हैं। इस दिन पितरों की कृपा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

धर्मग्रंथों के अनुसार भीष्म अष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की आरती और पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण की आरती का पाठ करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और परम कल्याण की प्राप्ति होती है।

भीष्म अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान-ध्यान कर पितरों को जल अर्पित करते हैं और पितृ देव की आरती करते हैं। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की आरती कर उनसे सुख, शांति और मोक्ष की कामना की जाती है। यह दिन श्रद्धा, आस्था और पितृ भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

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