
gmedianews24.com//नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ मास को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस वर्ष माघ शुक्ल सप्तमी पर एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन एक ओर रथ सप्तमी (Rath Saptami 2026) मनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मोक्षदायिनी मां नर्मदा का प्राकट्य दिवस यानी नर्मदा जयंती (Narmada Jayanti 2026) भी है।
अग्नि स्वरूप सूर्य देव और जल स्वरूप मां नर्मदा की एक साथ पूजा का यह संयोग भक्तों के लिए आरोग्य, सुख, शांति और समृद्धि का विशेष वरदान माना जा रहा है।
रथ सप्तमी और नर्मदा जयंती का महत्व (Rath Saptami–Narmada Jayanti Significance)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ सप्तमी को अचला सप्तमी भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर संपूर्ण ब्रह्मांड को ऊर्जा और जीवन शक्ति प्रदान करते हैं।
वहीं मां नर्मदा को एकमात्र ऐसी नदी माना जाता है, जिनकी परिक्रमा की जाती है और जिनके दर्शन मात्र से ही पापों का नाश हो जाता है। मान्यता है कि जब रथ सप्तमी और नर्मदा जयंती एक साथ आती हैं, तो स्नान, दान और पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
सूर्य पूजन विधि (Rath Saptami Puja Rituals)
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ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
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संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर स्नान के जल में नर्मदा जल या गंगाजल और तिल मिलाएं
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तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालें
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हाथ सिर के ऊपर उठाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें
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अर्घ्य देते समय मंत्र का जाप करें –
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” -
इसके बाद खड़े होकर सूर्य की तीन बार परिक्रमा करें
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अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें
नर्मदा जयंती पूजन विधि (Narmada Jayanti Puja Vidhi)
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मां नर्मदा की प्रतिमा स्थापित करें या शिवलिंग का जलाभिषेक करें
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सिंदूर, फूल, हलवा या खीर का भोग लगाएं
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नर्मदा जयंती पर दीप दान का विशेष महत्व है
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शाम के समय घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं
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यदि नदी तट पर हों तो आटे के 11 दीप जलाकर प्रवाहित करें
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पूजा के दौरान मंत्र जाप करें –
“त्वदीय पाद पंकजम्, नमामि देवी नर्मदे” -
अंत में आरती कर पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें







