[metaslider id="31163"]
Featuredज्ञान विज्ञान

विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे बड़े सहस्रलिंगम की स्थापना की पीठ पूजा, उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

gmedianews24.com/पूर्वी चंपारण। जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत कैथोलिया स्थित जानकी नगर में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े सहस्रलिंगम की स्थापना के लिए होने वाली पीठ पूजा को लेकर भव्य और भक्तिमय माहौल बना हुआ है। सुबह से ही बड़ी संख्या में शिवभक्त राम-जानकी पथ पर पैदल चलते हुए मंदिर परिसर की ओर पहुंच रहे हैं।

मंदिर परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चारों ओर “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालु शिव मंत्रों का जप कर रहे हैं, वहीं महिलाएं महादेव के मंगलगीत गाकर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना रही हैं। कुछ ही घंटों में काशी सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सहस्रलिंगम की पीठ पूजा की विधि प्रारंभ करेंगे।

सांसद सांभवी चौधरी और सायण कुणाल बने यजमान

इस पावन अवसर पर समस्तीपुर की सांसद सांभवी चौधरी और उनके पति सायण कुणाल यजमान के रूप में यज्ञ में शामिल हुए हैं। सायण कुणाल महावीर मंदिर न्यास, पटना के सचिव भी हैं। दोनों ने वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सहस्रलिंगम स्थापना अनुष्ठान में भाग लिया।

डेढ़ साल की मेहनत से खड़ा हुआ भव्य आधार

उल्लेखनीय है कि 20 जून 2023 को विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए शिलापूजन धार्मिक न्यास परिषद, पटना के तत्कालीन अध्यक्ष एवं मंदिर निर्माण के प्रणेता आचार्य किशोर कुणाल के नेतृत्व में किया गया था। इसके बाद करीब डेढ़ वर्षों तक प्रतिदिन लगभग 250 मजदूरों ने लगातार काम किया। इस दौरान जमीन के भीतर करीब 100 फीट तक कुल 3102 स्तंभ खड़े किए गए, जिन पर मंदिर की भव्य नींव तैयार हुई।

नींव का कार्य पूर्ण होने के बाद मंदिर परिसर में विशाल आधारपीठ का निर्माण किया गया। इसी आधारपीठ पर आज तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित 33 फीट ऊंचे और 33 फीट चौड़े सहस्रलिंगम की स्थापना की जा रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा सहस्रलिंगम बताया जा रहा है।

आस्था और संस्कृति का नया केंद्र

विराट रामायण मंदिर और सहस्रलिंगम की स्थापना को लेकर देशभर के शिवभक्तों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक न्यास परिषद और मंदिर न्यास से जुड़े लोगों का मानना है कि सहस्रलिंगम की स्थापना के बाद यह स्थल न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

Related Articles

Back to top button