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2040 तक भारत बनेगा परमाणु पनडुब्बियों में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शक्ति, ब्रिटेन को छोड़ेगा पीछे

gmedianews24.com/नई दिल्ली। भारतीय नौसेना तेजी से अपनी समुद्री ताकत बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मौजूदा योजनाओं और स्वदेशी निर्माण कार्यक्रमों के तहत वर्ष 2040 तक भारत परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों की संख्या के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच जाएगा। इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका, रूस और चीन के बाद शीर्ष समुद्री शक्तियों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

वर्तमान में दुनिया में परमाणु पनडुब्बियों के मामले में अमेरिका सबसे आगे है। उसके पास 60 से 70 के बीच परमाणु पनडुब्बियां हैं, जिनमें अटैक और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं। अमेरिका के बाद रूस और चीन का स्थान आता है। अभी चौथे नंबर पर ब्रिटेन है, जबकि उसके बाद फ्रांस का स्थान है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगले डेढ़ दशक में यह तस्वीर बदलने वाली है। भारत अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रम चला रहा है। इसी के तहत भारत पहले फ्रांस को पीछे छोड़ेगा और फिर 2040 तक ब्रिटेन को भी पछाड़ देगा। यह जानकारी रक्षा मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट idrw.org की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

फिलहाल भारतीय नौसेना के पास दो सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां हैं। एक तीसरी परमाणु पनडुब्बी के इस साल के अंत तक नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है, जबकि चौथी पनडुब्बी अगले वर्ष सेवा में आ सकती है। भले ही मौजूदा संख्या कम प्रतीत हो, लेकिन यह भारत की दीर्घकालिक रणनीति की शुरुआती अवस्था मानी जा रही है।

भारत की यह बढ़त पूरी तरह स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी कार्यक्रमों पर आधारित है। इसमें अरिहंत क्लास की पनडुब्बियां, भविष्य की S5 क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और प्रोजेक्ट-77 के तहत बनने वाली परमाणु अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं।

भारतीय नौसेना ने दो S5 क्लास पनडुब्बियों के निर्माण की शुरुआत कर दी है, जबकि भविष्य में चार और S5 क्लास पनडुब्बियां बनाने की योजना है। इस तरह कुल छह S5 क्लास पनडुब्बियां भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को मजबूत करेंगी। इसके अलावा प्रोजेक्ट-77 के तहत परमाणु अटैक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। शुरुआत में दो पनडुब्बियां होंगी, लेकिन आगे चलकर इनकी संख्या छह तक पहुंच सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ये परमाणु अटैक पनडुब्बियां न केवल विमानवाहक पोतों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएंगी, बल्कि दुश्मन पनडुब्बियों पर नजर रखने और समुद्री क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करेंगी।

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