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16 जनवरी को रखा जाएगा शुक्र प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

gmedianews24.com/नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत हर माह भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए रखा जाता है। प्रत्येक महीने में दो बार प्रदोष व्रत आता है—एक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को। खास बात यह है कि इस वर्ष जनवरी माह में दो नहीं बल्कि तीन प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

जनवरी महीने के दूसरे प्रदोष व्रत की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी कि यह व्रत 16 जनवरी को रखा जाएगा या 17 जनवरी को। पंचांग के अनुसार, माघ माह का यह प्रदोष व्रत 16 जनवरी को ही रखा जाएगा।

क्यों 16 जनवरी को रखा जाएगा व्रत

हिंदू पंचांग के मुताबिक, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 जनवरी की रात 8 बजकर 16 मिनट से होगी और इसका समापन 16 जनवरी की रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष काल 16 जनवरी को पड़ रहा है, इसलिए इसी दिन व्रत रखना शुभ माना गया है। यह व्रत शुक्रवार को होने के कारण शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा। मान्यता है कि शुक्र प्रदोष व्रत करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम को 6:22 बजे से रात 8:56 बजे तक रहेगा। करीब 2 घंटे 34 मिनट का यह समय पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा विधि सरल और सहज है। व्रती को सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल में शिवलिंग का जलाभिषेक करें और भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करें। माता पार्वती की भी विधिवत पूजा करें। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना भी आवश्यक माना गया है।

शाम के समय मंदिर में भगवान शिव की आरती करें और उसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें। व्रत की पूर्णता के लिए जरूरतमंदों को सफेद रंग की वस्तुओं का दान करना विशेष फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है और जीवन में सुख-शांति लाता है।

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