सूर्य उत्तरायण: मकर संक्रांति से शुरू होता है शुभ काल, स्वास्थ्य और आस्था से जुड़ा विशेष महत्व

gmedianews24.com/हर वर्ष 14 जनवरी को सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी खगोलीय परिवर्तन के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और उत्तरायण काल की शुरुआत होती है। भारतीय संस्कृति और परंपरा में उत्तरायण को अत्यंत शुभ समय माना गया है। इसी दिन मकर संक्रांति जैसे प्रमुख पर्व का आयोजन होता है, जिसका धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक महत्व बताया गया है।
शास्त्रों के अनुसार, सूर्य के उत्तरायण होने पर उसकी दिशा में परिवर्तन होता है, जिससे धरती पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। धार्मिक मान्यता है कि इस काल में किए गए दान, जप, तप और साधना का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इसी कारण उत्तरायण को ‘देवताओं का दिन’ भी कहा गया है और इसे जीवन में शुभ परिवर्तन का संकेत माना जाता है।
स्वास्थ्य पर उत्तरायण का प्रभाव
सूर्य के उत्तरायण होते ही दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं और सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक धरती पर रहता है। इससे मानव शरीर को प्राकृतिक रूप से अधिक ऊर्जा मिलती है। सर्दियों के बाद बढ़ती धूप से विटामिन-डी की पूर्ति होती है, जो हड्डियों और प्रतिरक्षा तंत्र के लिए आवश्यक है। आयुर्वेद के अनुसार, उत्तरायण काल में शरीर की पाचन शक्ति मजबूत होने लगती है। इस दौरान संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाने से स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार देखा जाता है।
धार्मिक कर्मों का श्रेष्ठ समय
धार्मिक दृष्टि से उत्तरायण को पुण्य कर्मों के लिए सर्वोत्तम माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस काल में किया गया स्नान, दान और तप विशेष फलदायी होता है। गंगा स्नान, तिल दान, दीपदान और माघ स्नान जैसे धार्मिक कार्यों का महत्व इसी समय बढ़ जाता है। मान्यता है कि उत्तरायण में सूर्य की किरणें अधिक सात्विक होती हैं, जो मन और आत्मा को शुद्ध करती हैं।
नए संकल्प और सकारात्मकता का प्रतीक
सूर्य उत्तरायण को जीवन में नई दिशा देने वाला काल माना जाता है। जैसे सूर्य अपनी गति बदलकर उत्तर की ओर अग्रसर होता है, वैसे ही व्यक्ति को भी अपने जीवन में आगे बढ़ने और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा मिलती है। दिन का बढ़ना प्रकाश, आशा और सक्रियता का प्रतीक है। यही कारण है कि इस समय लोग नए कार्यों की शुरुआत, व्रत और संकल्प लेते हैं।
कुल मिलाकर, सूर्य का उत्तरायण होना केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, आस्था और जीवन में संतुलन व सकारात्मकता लाने वाला शुभ परिवर्तन माना जाता है।




