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कोरबा: पूर्व युकां अध्यक्ष नितिन चौरसिया पर जानलेवा हमला, रॉड लगे पैर को ही बनाया निशाना; 4 के खिलाफ मामला दर्ज

gmedianews24.com/कोरबा। जिले के रामपुर स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष नितिन चौरसिया (38) पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। कॉलोनी के ही कुछ युवकों ने रास्ता रोककर न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि क्रूरता दिखाते हुए जानबूझकर उनके उसी पैर पर हमले किए जो पहले से क्षतिग्रस्त था और जिसमें रॉड डली हुई थी। पुलिस ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

तेज रफ्तार बाइक और बच्चे की सुरक्षा को लेकर हुआ विवाद घटना 7 जनवरी 2026 की रात लगभग 8:15 बजे की है। पीड़ित नितिन चौरसिया ने बताया कि आरोपी शिवम पांडेय, फरदीन, अभिषेक और तेजस उसी कॉलोनी के निवासी हैं। ये युवक अक्सर कॉलोनी की सड़कों पर तेज रफ्तार में बाइक दौड़ाते हैं। घटना वाले दिन इनकी लापरवाही के कारण नितिन का 5 वर्षीय बेटा दुर्घटना का शिकार होते-होते बचा।

जब नितिन ने युवकों को रोककर इस पर आपत्ति जताई, तो आरोपियों ने उल्टा जवाब देते हुए कहा, “अपने बेटे को घर के भीतर रखा करो, सड़क पर मत आने दिया करो।” उस वक्त नितिन के समझाने पर युवक वहां से चले गए, लेकिन वे रंजिश पाल बैठे थे।

पीछे से लात मारकर गिराया, फिर टूटे पैर पर किए वार नितिन जब कुछ देर बाद घर लौट रहे थे, तभी बड़ी संख्या में युवकों ने उन्हें घेर लिया। नितिन ने बताया कि वह बात करके मामला सुलझाना चाहते थे, लेकिन तभी पीछे से एक युवक ने लात मारकर उन्हें गिरा दिया। इसके बाद शिवम, फरदीन, अभिषेक और तेजस ने मिलकर लात-घूंसों से उनकी बेदम पिटाई की।

नितिन के अनुसार, कुछ महीने पहले एक अन्य हमले में उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ था, जिसके चलते पैर में रॉड लगी है। आरोपियों को इस बात की जानकारी थी। इसके बावजूद, उन्होंने जानबूझकर उसी क्षतिग्रस्त पैर को निशाना बनाया। हमले के कारण नितिन के दाएं पैर और पंजे में फिर से फ्रैक्चर हो गया है और शरीर में अंदरूनी चोटें आई हैं।

पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धाराओं में दर्ज किया जुर्म रामपुर चौकी पुलिस ने नितिन चौरसिया की रिपोर्ट पर आरोपी शिवम पांडेय, फरदीन, अभिषेक और तेजस के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 126(2), 296 और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित का मुलाहिजा (मेडिकल चेकअप) कराया गया है और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद मामले में और भी गंभीर धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।

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