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रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम पर कैबिनेट की नजर, आज होगी साल की आखिरी बैठक

gmedianews24.com/रायपुर। वर्ष 2025 की आखिरी कैबिनेट बैठक आज सुबह साढ़े ग्यारह बजे आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का अहम प्रस्ताव चर्चा में रहेगा। पुलिस कमिश्नर सिस्टम का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इस पर अधिकारियों के स्तर पर विस्तृत राय–मशविरा भी किया जा चुका है कि इसे किस स्वरूप में लागू किया जाए।

शुरुआत में यह चर्चा थी कि नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रभावशील हो जाएगा, लेकिन अभी तक इसे कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि किसी एक तारीख से ज्यादा जरूरी है कि सिस्टम पूरी तैयारी के साथ लागू हो। भले ही इसे एक-दो हफ्ते बाद शुरू किया जाए, लेकिन ढांचा मजबूत होना चाहिए।

वहीं, खड़मास का महीना चलने के कारण भी सिस्टम की औपचारिक शुरुआत में विलंब की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि मकर संक्रांति के बाद यानी 14 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया जा सकता है।

संभागीय आयुक्त कार्यालय बनेगा पुलिस कमिश्नर दफ्तर

पुलिस कमिश्नर कार्यालय के लिए संभागीय आयुक्त कार्यालय का चयन किया गया है। नया भवन तैयार हो चुका है और संभागीय आयुक्त महादेव कांवड़े वहां शिफ्ट भी हो गए हैं। कार्यालय में आवश्यक फर्नीचर उपलब्ध है। वर्तमान एसपी कार्यालय को कंपोजिट बिल्डिंग के निर्माण के लिए तोड़ा जाना प्रस्तावित है, ऐसे में संभागीय आयुक्त कार्यालय को ही पुलिस कमिश्नर कार्यालय के रूप में उपयोग में लाया जाएगा। हालांकि खड़मास के चलते इसके औपचारिक शुभारंभ में देरी हो सकती है।

सिर्फ नाम का कमिश्नर?

सूत्रों के अनुसार, भले ही पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया जाए, लेकिन शुरुआती दौर में यह केवल नाममात्र का हो सकता है। बताया जा रहा है कि प्रतिबंधात्मक धारा 151 के अलावा अन्य बड़े अधिकार पुलिस कमिश्नर को देने के पक्ष में शासन-प्रशासन नहीं है। यानी अधिकारों के मामले में पुलिस कमिश्नर, वर्तमान एसपी से बहुत अलग नहीं होगा।

ओडिशा मॉडल की चर्चा

देश में हाल ही में ओडिशा ने एक्ट बनाकर प्रभावी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया है, जिसे सबसे मजबूत मॉडल माना जा रहा है। वहीं मध्यप्रदेश में आईएएस लॉबी के विरोध के चलते कमजोर और अधिकारविहीन सिस्टम लागू हुआ, जिससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। अब मध्यप्रदेश में भी ओडिशा मॉडल को अपनाने पर मंथन चल रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इसी मुद्दे पर मतभेद सामने आ रहे हैं।

अंग्रेजी शासन से चली आ रही व्यवस्था

पुलिस कमिश्नर सिस्टम की शुरुआत अंग्रेजी शासनकाल में हुई थी। आजादी से पहले कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई थी। बाद में पुलिस अधिनियम 1861 के तहत इसे देश के अन्य बड़े शहरों में भी लागू किया गया।

दंडाधिकारी शक्तियों से मिलती है त्वरित कार्रवाई की क्षमता

पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने पर पुलिस कमिश्नर को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार मिलते हैं। इससे धरना-प्रदर्शन, जुलूस, लाठीचार्ज जैसी स्थितियों में पुलिस को तत्काल निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। अभी पुलिस को ऐसे मामलों में कलेक्टर या मजिस्ट्रेट के आदेश का इंतजार करना पड़ता है।

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