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कोरबा में भू-विस्थापितों का गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय घेराव, मुआवजा व रोजगार की मांग तेज

gmedianews24.com/कोरबा। जिले के पोंडी, बाहनपाठ और अमगांव के भू-विस्थापितों ने वैकल्पिक रोजगार और बढ़ी हुई मुआवजा राशि की मांग को लेकर गेवरा परियोजना स्थित एसईसीएल महाप्रबंधक कार्यालय का करीब चार घंटे तक घेराव किया। इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ किसान सभा का समर्थन मिला, जिसके कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में घेराव में शामिल हुए।

आंदोलन के दौरान ग्राम पोंडी के भू-विस्थापित मनोज राठौर ने एसईसीएल अधिकारियों को बताया कि नरईबोध, भठोरा, भिलाई बाजार और रलिया गांवों के भू-विस्थापितों को कंपनी सेक्रेटरी के स्वीकृत मिनट्स क्रमांक 326 एवं निदेशक मंडल की बैठक के अनुसार बढ़ी हुई मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है। वहीं पोंडी, बाहनपाठ और अमगांव के भू-विस्थापितों को समान अधिसूचना प्रकाशन (धारा-9) के बावजूद इस बढ़ी हुई राशि से वंचित रखा गया है, जो भेदभावपूर्ण है।

प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप

मनोज राठौर ने आरोप लगाया कि एसईसीएल प्रबंधन ने छोटे खातेदारों को खदान में वैकल्पिक कार्यों के माध्यम से रोजगार देने का वादा किया था, खासकर उन परिवारों को जिनके सदस्यों को स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी। लेकिन गांवों के अधिग्रहण को 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं किया गया, जिससे भू-विस्थापित परिवार आज भी बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

बड़े आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि प्रबंधन किसानों को गुमराह कर जमीन अधिग्रहण कर रहा है। अधिग्रहण के बाद भू-विस्थापित किसान रोजगार, मुआवजा और बसावट के लिए वर्षों से भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो गेवरा और कुसमुंडा क्षेत्र के किसानों को एकजुट कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

खदान विस्तार कार्य ठप करने की चेतावनी

भू-विस्थापितों ने बताया कि उन्होंने गेवरा महाप्रबंधक और जिला प्रशासन से कई बार समस्याओं के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। जनपद सदस्य नेहा राजेंद्र सिंह तंवर ने स्पष्ट कहा कि यदि भू-विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो खदान विस्तार का कार्य ठप कर दिया जाएगा।

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