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हिंदू धर्म में भोजन से पहले और बाद के नियम, मां अन्नपूर्णा की कृपा से बढ़ती है सुख-समृद्धि

gmedianews24.com/हिंदू धर्म में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक पवित्र यज्ञ और प्रसाद माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, भोजन करने के कुछ नियमों का पालन करने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मां अन्नपूर्णा की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और तरक्की भी आती है। आइए जानते हैं भोजन से पहले और बाद में पालन किए जाने वाले प्रमुख धार्मिक नियम।

हाथ-पैर धोकर ही करें भोजन

भोजन से पहले हाथ, पैर और मुंह अच्छी तरह धोना आवश्यक बताया गया है। ऐसा करने से दिनभर की धूल-मिट्टी और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि अशुद्ध शरीर से किया गया भोजन रोग और दरिद्रता का कारण बनता है। साफ-सुथरे होकर भोजन करने से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और भोजन शरीर को सही पोषण देता है।

जमीन पर बैठकर भोजन करने की परंपरा

हिंदू धर्म में कुर्सी-टेबल पर भोजन करने की बजाय जमीन पर आसन लगाकर बैठने को श्रेष्ठ माना गया है। इससे पृथ्वी तत्व से जुड़ाव होता है और भोजन में स्थिरता आती है। मान्यता है कि ऊंचे स्थान पर बैठकर भोजन करने से अहंकार बढ़ता है और धन स्थिर नहीं रहता, जबकि जमीन पर बैठकर भोजन करने से मां अन्नपूर्णा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

भोजन से पहले मंत्र का उच्चारण

भोजन शुरू करने से पहले यह मंत्र बोलने की परंपरा है—
“ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ ॐ शांति शांति शांतिः।”
इस मंत्र से भोजन में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है, मन शांत होता है और भोजन पवित्र प्रसाद बन जाता है।

थाली में अन्न न छोड़ें

शास्त्रों में जूठन छोड़ना निषेध माना गया है। थाली में उतना ही भोजन लें, जितना खाया जा सके। मान्यता है कि जूठन छोड़ने से मां अन्नपूर्णा रुष्ट हो जाती हैं और घर में दरिद्रता आती है। पूरा भोजन करने से संतोष और अगले भोजन में बरकत बनी रहती है।

थाली के चारों ओर जल छिड़कें

भोजन से पहले थाली के चारों ओर थोड़ा जल छिड़कना शुभ माना गया है। इससे नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और भोजन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। इस दौरान मन में “ॐ श्रीं ह्रीं अन्नपूर्णायै नमः” का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है।

सही दिशा और मौन का पालन

भोजन करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना गया है। इससे सूर्य और कुबेर की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही भोजन करते समय मौन रहना चाहिए। बातचीत करने से भोजन का रस कम हो जाता है और पाचन प्रभावित होता है।

भोजन के बाद वज्रासन और मंत्र

भोजन पूरा होने के बाद यह मंत्र बोलने की परंपरा है—
“अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम। भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं।।”
इसके बाद 5 से 10 मिनट तक वज्रासन में बैठने से भोजन अच्छे से पचता है और शरीर को लाभ मिलता है।

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