
gmedianews24.com/नई दिल्ली। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के मामले में शनिवार को बड़ा आदेश सुनाते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला आपराधिक साजिश और हत्या के प्रयास का बनता है तथा आरोपी को मुख्यमंत्री “आसान शिकार” लगीं।
एडीशनल सेशन जज (ASJ) एकता गौबा मान ने आरोपी साकरिया राजेशभाई खिमजी और सैयद तहसीन रजा रफीउल्लाह शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में आरोप तय करने के आदेश दिए। मामले में आरोपों की औपचारिक स्वीकृति या अस्वीकृति के लिए अगली सुनवाई 26 दिसंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
CCTV और कॉल रिकॉर्ड से साजिश का संकेत
अदालत ने कहा कि CCTV फुटेज से यह स्पष्ट होता है कि घटना से एक दिन पहले आरोपियों ने शालीमार बाग स्थित मुख्यमंत्री के निजी आवास की रेकी की थी। चार्जशीट में दोनों आरोपियों के बीच कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को भी शामिल किया गया है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपी राजेश ने मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस के वीडियो क्लिप सह-आरोपी तहसीन रजा को भेजे थे। ये सभी तथ्य पहली नजर में मुख्यमंत्री की हत्या के इरादे से रची गई आपराधिक साजिश की ओर इशारा करते हैं।
सुरक्षा घेरा तोड़कर किया हमला
कोर्ट के मुताबिक, आरोपी साकरिया राजेशभाई सुरक्षा घेरा तोड़ने में सफल रहा और मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। उसने मुख्यमंत्री के साथ मारपीट की, जिससे उनके सिर के टेम्पोरल हिस्से में चोट आई, नाक से खून बहा और होंठ पर भी चोट लगी। इसके बाद आरोपी ने दोनों हाथों से उनका गला दबाया और जान से मारने की धमकी दी। घटना के दौरान मुख्यमंत्री की रक्षा करने की कोशिश कर रहे धीरेंद्र नामक व्यक्ति को भी आरोपी ने मुक्का मारा।
इन धाराओं में तय हुए आरोप
अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 221 (सरकारी कर्मचारी को रोकना), 132 (सरकारी कार्य में बाधा डालने के लिए हमला) और 109(1) (हत्या का प्रयास) के तहत मामला बनता बताया है। इसके अलावा आरोपी साकरिया राजेशभाई खिमजी के खिलाफ धारा 115(2) (चोट पहुंचाना) भी अतिरिक्त रूप से लागू की गई है।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि आरोपी दिल्ली का निवासी नहीं था और सुप्रीम कोर्ट के किसी आदेश से जुड़ी शिकायत को लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचने का उसके पास कोई वैध आधार नहीं था। पीड़िता एक महिला हैं और कानून हर महिला को समान सुरक्षा प्रदान करता है, चाहे वह आम नागरिक हो या मुख्यमंत्री।






