
gmedianews24.com/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे के बाद रेलवे प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि जिस लोको पायलट के जिम्मे मेमू लोकल ट्रेन चलाई जा रही थी, वह रेलवे के साइकोलॉजिकल टेस्ट में असफल हो चुका था। इसके बावजूद अधिकारियों ने उसे ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी। जबकि पैसेंजर ट्रेन चलाने के लिए इस टेस्ट को पास करना अनिवार्य होता है।
4 नवंबर को गेवरारोड स्टेशन के पास मेमू लोकल और मालगाड़ी की टक्कर में कई लोगों की मौत और घायल होने के बाद रेलवे जोन के अधिकारी सकते में आ गए थे। हादसे के बाद रेलवे की पांच सदस्यीय जांच टीम ने प्रारंभिक जांच में प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी खामियों को बड़ी वजह माना है।
CRS ने पूछताछ की
कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) ने 6 नवंबर को हादसे से जुड़े दस से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की। इसमें एससीआर, एआरटी, एआरएमवी इंचार्ज और कंट्रोलर डिपार्टमेंट के कर्मचारियों से वन-टू-वन कई घंटों तक पूछताछ की गई।
ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम पर भी उठे सवाल
जांच में यह भी पाया गया कि रेलवे का ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम तकनीकी खामियों से ग्रस्त था। सिग्नलिंग की इसी गड़बड़ी को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है।





