gmedianews24.com/कोरबा। जिले के ग्रामीण और जंगली इलाकों में इन दिनों जुआरियों का बोलबाला देखने को मिल रहा है। खुलेआम चल रहे जुए के अड्डों ने न केवल क्षेत्र का सामाजिक वातावरण खराब कर दिया है, बल्कि पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गोढ़ील और चाकामार जंगल बने जुए का अड्डा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम गोढ़ील, जंगल, चाकामार और कोरकोमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जुआ खेला जा रहा है। प्रतिदिन यहां लाखों रुपये के दांव लगाए जाते हैं। मशहूर ‘52 परी’ खेल में प्रति घंटे 50 हजार रुपये तक की वसूली होती है।
स्थानीय से लेकर बाहरी खिलाड़ी तक शामिल
इन जुआ अड्डों पर स्थानीय लोगों के साथ बाहरी खिलाड़ी भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। बताया जा रहा है कि अब जुआ खेलने का काम संगठित गिरोह के रूप में हो रहा है, जिनका संचालन कुछ प्रभावशाली लोगों की निगरानी में किया जा रहा है।





