देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह 2025 : भगवान विष्णु जागे योगनिद्रा से, तुलसी-शालिग्राम विवाह से गूंजे मंदिर

gmedianews24.com/नई दिल्ली। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) और इसके अगले दिन होने वाला तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) इस वर्ष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह तिथि भगवान विष्णु के चार महीने की योगनिद्रा से जागने और चातुर्मास की समाप्ति का प्रतीक मानी जाती है।
भक्तों के अनुसार, इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। तुलसी विवाह का आयोजन कई मंदिरों और घरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी और भगवान शालिग्राम के विवाह का आयोजन कराने से कन्यादान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
पूजन सामग्री (Puja Samagri)
तुलसी का पौधा, भगवान शालिग्राम की प्रतिमा, सुहाग सामग्री, गन्ने से बना मंडप, पूजा की चौकी, पीले और लाल वस्त्र, चंदन, रोली, अक्षत, फूल-माला, मौली, दीपक, धूप, कपूर, कलश, पंचामृत आदि पूजन में उपयोग किए जाते हैं।
पूजा विधि (Puja Vidhi)
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है।
शंखनाद कर उन्हें वैदिक मंत्रों से जगाया जाता है।
शाम के समय तुलसी के पौधे के ऊपर गन्ने का मंडप बनाकर भगवान शालिग्राम को पीले वस्त्र में विराजमान किया जाता है।
गोधूलि बेला में तुलसी और शालिग्राम का विवाह संपन्न कराया जाता है।
तुलसी माता को सुहाग की सामग्री और लाल चुनरी चढ़ाई जाती है, जबकि भगवान शालिग्राम को पीला वस्त्र और जनेऊ अर्पित किया जाता है।
विवाह के मंगल गीत गाए जाते हैं और कपूर से आरती कर पूजा पूर्ण की जाती है।





