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भारत में उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों का सबसे बड़ा बोझ: WHO की वैश्विक रिपोर्ट में खुलासा

gmedianews24.com/नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों (NTD) पर जारी वैश्विक रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत इन रोगों का दुनिया में सबसे बड़ा बोझ झेल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की 42 प्रतिशत आबादी जिन्हें एनटीडी के उपचार की आवश्यकता है, वे भारत में रहती हैं। यह संख्या पूरे अफ्रीकी महाद्वीप की आबादी (35 प्रतिशत) से भी अधिक है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत ने एनटीडी उपचार की आवश्यकता वाली आबादी में वैश्विक स्तर पर दूसरी सबसे बड़ी कमी दर्ज की है। यह 2030 तक इन बीमारियों के उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में भारत की निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

WHO रिपोर्ट में बताया गया है कि डेंगू और लसीका फाइलेरिया (LF) भारत में सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ बनी हुई हैं। देश में विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALYs) के संदर्भ में डेंगू सबसे बड़ा रोग भार योगदानकर्ता है, जबकि इसके बाद एलएफ का स्थान है।

डब्ल्यूएचओ की यह तीसरी निगरानी रिपोर्ट 2021-2030 रोडमैप के शुभारंभ के बाद वैश्विक प्रगति का एक स्नैपशॉट पेश करती है। इसमें बताया गया है कि 2023 में दुनिया भर में 1.495 अरब लोगों को एनटीडी हस्तक्षेप की आवश्यकता थी — जो 2010 की तुलना में 32 प्रतिशत कम है।

डब्ल्यूएचओ के कार्यवाहक निदेशक (मलेरिया और एनटीडी) डॉ. डैनियल नगामीजे मदंडी ने कहा कि “कई चुनौतियों के बावजूद, एनटीडी कार्यक्रम महत्वपूर्ण परिणाम दे रहे हैं और बड़ी आबादी को इन प्राचीन बीमारियों से मुक्त कर रहे हैं।” रिपोर्ट में बताया गया कि 2023 में 86.7 करोड़ लोगों का इलाज किया गया और 2024 के अंत तक 12 निर्माताओं द्वारा 19 दवाइयाँ एनटीडी उपचार के लिए दान की जा रही थीं।

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