
gmedianews24.com/पुणे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बुधवार को कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी गई थी। अगर उस समय एयरफोर्स का इस्तेमाल होता तो चीनी आक्रमण को काफी हद तक कमजोर किया जा सकता था और दुश्मन पर दबाव डाला जा सकता/ था।
CDS चौहान ने यह टिप्पणी पुणे में दिवंगत लेफ्टिनेंट जनरल एस पी पी थोराट की संशोधित आत्मकथा ‘रेवेइल टू रिट्रीट’ के विमोचन समारोह के दौरान की। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में भाग लिया।
जनरल चौहान ने कहा कि वायुसेना के इस्तेमाल से सेना को जल्दी और निर्णायक हमला करने का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय एयरफोर्स के इस्तेमाल को तनाव बढ़ाने वाला कदम माना जाता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बदलते दृष्टिकोण का सटीक उदाहरण है।







