सर्वपितृ अमावस्या 2025: सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी पूजा से जुड़े महत्वपूर्ण नियम और उपाय

gmedianews24.com/नई दिल्ली। पितृ पक्ष का समापन जल्द ही होने जा रहा है और सर्वपितृ अमावस्या 2025 के दिन सूर्य ग्रहण लगने वाला है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। पितृ पक्ष की यह आखिरी तिथि पितृों के पितृलोक लौटने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में तुलसी पूजा और उससे जुड़े नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
तुलसी पूजा करना सही या गलत?
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सर्वपितृ अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण का साया होने के कारण तुलसी पूजा करना शुभ नहीं माना गया।
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इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही तुलसी को स्पर्श करें।
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नियमों की अनदेखी करने पर जीवन में नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या पर कर सकते हैं ये उपाय:
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धन संबंधित समस्याओं के निवारण के लिए पीले धागे या लाल कलावे में 108 गांठ लगाकर इसे तुलसी के गमले में बांधें।
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शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर 7 बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से साधक को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
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तुलसी चालीसा का पाठ और तुलसी माता के मंत्रों का जप भी लाभकारी होता है।
मुख्य तुलसी मंत्र:
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तुलसी गायत्री मंत्र:
ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।। -
तुलसी स्तुति मंत्र:
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।। -
तुलसी नामाष्टक मंत्र:
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन उपायों का पालन करने से साधक को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।





