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जितिया व्रत 2025: मातृत्व और संतान के अटूट रिश्ते का प्रतीक, जानें धागे से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

gmedianews24.com/भारत में जितिया व्रत का विशेष महत्व है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। माताएं यह व्रत अपने बच्चों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए बड़े श्रद्धा भाव से करती हैं। खास बात यह है कि इस उपवास में माताएं निर्जला रहकर तीन दिनों तक कठिन तप करती हैं।

व्रत का सबसे अहम हिस्सा है “जितिया का धागा”, जिसे मां और संतान दोनों पहनते हैं। यह धागा केवल एक धागा नहीं माना जाता, बल्कि मां और बच्चे के बीच अटूट रिश्ते और सुरक्षा का प्रतीक है। यही कारण है कि व्रत के दौरान इसे बेहद पवित्र मानकर धारण किया जाता है।

भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, व्रत पूरा होने के बाद इस धागे को सहज श्रद्धा के साथ सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए। कुछ लोग इसे घर के पूजन स्थल में रख देते हैं, तो कई इसे नदी में प्रवाहित कर धार्मिक रीति से विसर्जित करते हैं।

जितिया व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि मातृत्व और संतान के रिश्ते को और भी मजबूत बनाने वाला त्योहार माना जाता है।

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