
gmedianews24.com/काठमांडू: नेपाल में बीते दिनों हुई हिंसा और अशांति के बाद आखिरकार सरकार ने सोशल मीडिया सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया है। सरकार का यह फैसला तब आया है जब देश में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान 18 लोगों की मौत हो चुकी है और स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।
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क्या हुआ था?
पिछले कुछ दिनों से नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ और सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर युवा लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। ये प्रदर्शन अचानक तब हिंसक हो गए, जब आज सुबह सैकड़ों की संख्या में युवा और छात्र सीधे संसद भवन में घुस गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सरकार देश के संविधान और लोकतंत्र का सम्मान करे और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए।
सेना की फायरिंग और 200 घायल:
प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सेना ने मोर्चा संभाला। जब प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इनकार किया तो सेना को मजबूरन फायरिंग करनी पड़ी। इस फायरिंग में करीब 200 से ज्यादा लोग घायल हुए, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। इस घटना में 18 लोगों की जान चली गई, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल है।
सोशल मीडिया पर बैन:
सरकार ने हिंसा को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इससे आम जनता और मीडिया दोनों के लिए सूचना का आदान-प्रदान करना मुश्किल हो गया था। सरकार ने तर्क दिया था कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल अफवाहें फैलाने और हिंसा भड़काने के लिए किया जा रहा था।
बैन हटाए जाने के बाद की स्थिति:
अब जब सोशल मीडिया को फिर से शुरू कर दिया गया है, तो लोगों ने इस घटना पर अपना गुस्सा जाहिर करना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं और हिंसक कार्रवाई के लिए कड़ी निंदा कर रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है और सरकार से शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है।
नेपाल में अभी भी तनाव का माहौल है, और सरकार पर प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने और स्थिति को सामान्य करने का दबाव है।







