
gmedianews24.com/बालोद। महिला आरक्षक द्वारा लगाए गए दुष्कर्म, जबरन गर्भपात और आर्थिक शोषण के आरोपों में घिरे डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अब कभी भी उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।
मामला तब सामने आया जब पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में आईटीआई में पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच जान-पहचान हुई और आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने बताया कि वह तीन बार गर्भवती हुई, लेकिन आरोपी ने हर बार जबरन दवा खिलाकर गर्भपात कराया।
शिकायत में महिला ने यह भी कहा कि पढ़ाई के दौरान उसने आरोपी को आर्थिक मदद दी। 2024 में आरोपी ने कार खरीदी और उसे अंडमान घुमाने ले गया, वहां भी संबंध बनाए गए। इसके अलावा 3.30 लाख रुपये आरोपी के खाते में ट्रांसफर करने का भी आरोप लगाया गया है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि यह मामला ब्लैकमेलिंग का है और झूठा आरोप लगाया गया है। वहीं, पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान के साथ बैंक स्टेटमेंट समेत सबूत भी पेश किए। सबूतों और दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर डौंडी थाना में अपराध दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। बताया जा रहा है कि दिलीप उइके बीजापुर के भोपालपटनम जनपद सीईओ पद पर पदस्थ रहते हुए कई बार सुर्खियों में आए थे।







